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jin raato.n kii bhor nahii.n hai.n

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जिन रातों की भोर नहीं है
आज ऐसी ही रात आई
जो जिस ग़म में डूब गया है
सागर की है गहराई

रात के तारों तुम ही बताओ
मेरी वो मंज़िल है कहाँ
पागल बनकर जिसके लिये मैं
खो बैठा हूँ दोनो जहाँ
जिन रातों ...

राह किसी की हुई ना रोशन
जलना मेरा बेकार गया
लूट गई तक़दीर मुझे मैं
जीत के बाज़ी हार गया
जिन रातों की भोर नहीं है ...

Comments/Credits:

			 % Credits: Bijal C. Modi (bijal@fission.Nuc.Berkeley.EDU)
%          Preetham Gopalaswamy (preetham@src.umd.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@astro.indiana.edu)
		     
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