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jab jaag uThe aramaa.n, to kaise nii.nd aaye

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जब जाग उठे अरमां तो कैसे नींद आए
हो घर में हसीं मेहमां तो कैसे नींद आए, नींद आए
जब जाग उठे अरमां तो कैसे नींद आए

(ये रात ये दिल की धड़कन ये बढ़ती हुई बेताबी
इक जाम की खातिर जैसे बेचैन हो कोई शराबी ) - (२)
शोलों में गिरी हो जान तो कैसे नींद आए
जब जाग उठे अरमां तो कैसे नींद आए

(नज़दीक बहुत है मंज़िल फिर भी है ग़ज़ब की दूरी
ऐ दिल ये तू ही बतला दे ये कौन सी है मजबूरी ) - (२)
जब सोच में हो इनसां तो कैसे नींद आए
हो घर में हसीं मेहमां तो कैसे नींद आये, नींद आए
जब जाग उठे अरमां तो कैसे नींद आए

Comments/Credits:

			 % Credits: C. S. Sudarshana Bhat (cesaa129@utacnvx.uta.edu)
%          Preetham Gopalaswamy (preetham@src.umd.edu)
		     
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