Browse songs by

jaate\-jaate ik nazar bhar dekh lo dekh lo

Back to: main index
View: Plain Text, हिंदी Unicode, image


जाते-जाते इक नज़र भर देख लो देख लो -२

सुबह का वक़्त हुआ आई गुलशन में सबा
छिड़ गया साज-ए-चमन गूँजी आवाज़-ए-चमन
नाला बुलबुल ने किया खुल गया राज़-ए-चमन
फूल मुस्कराने लगे इश्क़ फ़रमाने लगे
आह-ए-बुलबुल से मगर फैली गुलशन में ख़बर
इश्क़ बदनाम हुआ चल गया सबको पता
बाग़बाँ आ ही गया प्यार की देने सदा
फूल शाखों से चुने नाले बुलबुल से सुने
हार कुछ गूँथ लिए हँसते दिल तोड़ दिए
आँसू शबनम के बहे और ख़ामोश रहे
हार फूलों के जो गुलशन से लेकर वो चला
अपने फूलों से मचलती हुई बुलबुल ने कहा
क्या
जाते-जाते इक नज़र भर ...

शमा ने जलवे लुटाए जो शबिस्तानों में
शौक़ जल जाने का पैदा हुआ परवानों में -२
सर हथेली पे लिए इश्क़ के जांबाज़ चले
आग सीने में छुपाए हुए हमराज़ चले
शमा ने देखा जो आते हुए परवानों को
बोली बिठलाऊँ कहाँ इश्क़ के मेहमानों को
कौन समझाएगा इन चाक़-गरेबानों को
सिरफिरा कहती है दुनिया मेरे दीवानों को
ऐसे दीवाने कि मरने की क़सम खाए हुए
इश्क़ की आग में जलने के लिए आए हुए
कहते हैं
जाते-जाते इक नज़र भर ...

मुँह फिराऊँगी तो महफ़िल से निकल जाएँगे
उनको सीने से लगाऊँगी तो जल जाएँगे
बोले परवाने हमें इश्क़ में जल जाने दे
जान के साथ ये अरमान निकल जाने दे
कह के शौक़ में दीवाने पे दीवाना गिरा
इश्क़ की आग में परवाने पे परवाना गिरा
अहल-ए-दिल जलवा-ए-जानां पे फ़िदा होने लगे
शमा की लौ से गले मिल के जुदा होने लगे
इश्क़ में देख कर क़ुर्बानी इन दीवानों की
शमा ने इतना कहा लाश पे परवानों की
क्या
जाते-जाते इक नज़र भर ...

View: Plain Text, हिंदी Unicode, image