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jaane kyaa haal ho kal shiishe kaa paimaane kaa

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जाने क्या हाल हो कल शीशे का पैमाने का
आज दर चोड़ चला है कोई मैख़्हाने का
जाने क्या हाल हो...

हाथ थर्राने लगे, जाम गिरा टूट गया
ये कोई वक़्त न था आप के याद आने का
जाने क्या हाल हो...

फिर न शरमाओगे तुम अपनी कहानी सुन के
दर्द ठोडऽअ सा मिला लो मेरे अफ़साने का
जाने क्या हाल हो...

बेवफ़ाई का गिला सुन के हँसि आती है
ढूँढिये और बहाना कोई तड़पाने का

जाने क्या हाल हो कल शीशे का पैमाने का
आज दर चोड़ चला है कोई मैख़्हाने का

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
		     
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