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jaane kitanii baar h^Riday se mai.nne

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जाने कितनी बार हृदय से मैंने उसे पुकारा
निठुर पिया के कानों तक पर मेरी आवाज़ न पहुँची

जाने कितने सावन बीते ग़म के आँसू पीते-पीते
जो बात सजन से कहनी थी लब तक मेरे वो बात न पहुँची

जाने कितने देखें सपने जब से रूठे प्रियतम अपने
ढल चली उमर अरमानों की पर सपनों की वो रात न पहुँची

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Arunabha S Roy
% Date: 25 Mar 2003
% Series: LATAnjali
% generated using giitaayan
		     
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