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jaa re kaare badaraa balam ke dwaar

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जा रे कारे बदरा बलम के द्वार -२
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
जा रे कारे बदरा बलम के द्वार
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
वहीं जा के रो
जा रे कारे बदरा बलम के द्वार
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार

किनकी पलक से पलक मोरी उलझी -२
निपट अनाड़ी से लट मोरी उलझी
कि लट उलझा के मैं तो गई हार

वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
वहीं जा के रो
जा रे कारे बदरा बलम के द्वार
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार

अंग उन्हीं की लहरिया समाई -२
तबहूँ ना पूछें लूँ काहे अंगड़ाई
के सौ सौ बल खा के मैं तो गई हार

वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार

थाम लो बइयाँ चुनर समझावे -२
गरवा लगा लो कजर समझाओ
के सब समझा के मैं तो गई हार

वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार
वहीं जा के रो
जा रे कारे बदरा बलम के द्वार
वो हैं ऐसे बुद्धू न समझें रे प्यार -२

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