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ik sunaharii shaam thii bahakii\-bahakii zi.ndagii

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इक सुनहरी शाम थी बहकी-बहकी ज़िंदगी
राह में हम तुम मिले मेरी पलकों के तले आशियाँ तेरा बन गया
इक सुनहरी शाम

दो क़दम मिलकर चले तो फ़ासले कम हो गए
प्यार ने दुनिया बदल दी क्या से क्या हम हो गए
शोले शबनम हो गए
इक सुनहरी शाम थी ...

शाम तो अब तक वही है रंग है लेकिन जुदा
जाने किस वादी में अपनाअ क़ाफ़िला गुम हो गया
फिर है दिल तन्हा मेरा
इक सुनहरी शाम थी ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Arunabha S Roy
% Date: 14 Sep 2004
% Series: LATAnjali
% generated using giitaayan
		     
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