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hare muraare ... jay jagadiish hare

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हरे मुरारे मधु कैटभ हारे
गोपाल गोविन्द मुकुन्द शौरे

* प्रलय पयोधि जले, ध्रुतवन असि वेदम
विहित वहित्र चरित्रम अखेदम
केशव, ध^ऱ्त मिन शरिर, जय जगदिश हरे

* चलयसि विक्रमने, बलिम अद्भुत वमन
पद नख निर जनित जन पवन
केशव, ध^ऱ्त वमन रुप, जय जगदिश हरे

* वितरसि दिक्षु रने, दिक-पति कमनियम
दश-मुख मोउलि बलिम रमनियम
केशव, ध^ऱ्त रम शरिर, जय जगदिश हरे

* निन्दसि यज्न्य विदेर-अहह श्रुति जतम
सदय ह्रुदय दर्शित पशु घतम
केशव, ध^ऱ्त बुद्ध शरिर, जय जगदिश हरे

* म्लेच्च निवह निधने कलयसि करवलम
धुमकेतुम इव किमपि करलम
केशव, ध^ऱ्त कल्कि शरिर, जय जगदिश हरे

वेदन उद्धरते, जगन-निवहते, भुगोलम उद-बिभ्रते
दैत्यम दरयतेम बलिम चलयते, क्षत्र क्षयम कुर्वते
पोउलस्यम जयते, हलम कलयते, करुन्यम अतन्वते
म्लेच्चन मुर्चयते, दशक्रुति क्रुते, ख़्रुश्नय तुभ्यम नमः.

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