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har tan me.n kavi ... kavi re o kavi re

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हर तन में कवि, हर मन में कवि
जब ग़म के दीप जले लगते
(ऐसे में बता तुझे हाय रे हाय क्यों
प्रीत के गीत भले लगते) -२

कवि रे ओ कवि रे

जब पग-पग अपनी धरती पर
अंधकार ने डाले हों डेरे
इक मुट्ठी भर दानों के लिये
जब मरते बालक बहुतेरे
जब रात-दिना हर धन वाला
जीवन से गरीबों के खेले
जब जीना इक अपराध लगे -२
जब मानव दुख पर दुख झेले

(ऐसे में बता तुझे हाय रे हाय क्यों
प्रीत के गीत भले लगते) -२

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Arunabha S Roy
% Date: 22 Sep 2003
% Series: GEETanjali
% generated using giitaayan
		     
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