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ha.Nsii ha.Nsii na rahii aur Kushii Kushii na rahii

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हँसी हँसी न रही और ख़ुशी ख़ुशी न रही
मैं ज़िन्दगी जिसे समझूँ वो ज़िन्दगी न रही

जियूँ तो किसके लिए और मरूँ तो किसके लिए
जो एक आस बँधी थी वो आस ही न रही

कुछ आ के ग़म के अँधेरे ने ऐसा घेर लिया
चिराग़ जलते रहे और रोशनी न रही

अँधेरी रात है अब और बुझा सा दिल का दिया
जो चार दिन के लिए थी वो चाँदनी न रही
हँसी हँसी न रही ...

Comments/Credits:

			 % Credits: This lyrics were printed in Listeners' Bulletin Vol #48 under Geetanjali #38
		     
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