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Gazab kaa hai din, socho zaraa

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ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा
ये दीवानापन, देखो ज़रा
तुम हो अकेले, हम भी अकेले
मज़ा आ रहा है, क़सम से, क़सम से

देख लो, हमको करीब से
आज हम मिले हैं नसीब से
ये पल फिर कहाँ
और ये मंजिल फिर कहाँ, ग़ज़ब ...

क्या कहूँ, मेरा जो हाल है
रात दिन, तुम्हारा खयाल है
फिर भी, जान-ए-जां
मैं कहाँ और तुम कहाँ, ग़ज़ब ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Ravi Kant Rai (rrai@plains.nodak.edu)
% Credits: Satish Subramanian (subraman@cs.umn.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@astro.indiana.edu)
		     
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