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din chhip gayaa nikale taare

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(दिन छिप गया निकले तारे
तेरी याद में दर्द के मारे
रुक जाये ना ?, घर आजा रे बलम
दिल रो रो तुझे पुकारे)-२

(मेरे साजन मुखड़ा मोड़ गये
क्यों दिल में अंधेरा छोड़ गये)-२
ऐ चान्द बता, मेरी क्या है खता
जो रूठे पिया हमारे
दिन छिप गया निकले तारे

(मेरी मन ही मन में बात रही
नैनों में सदा बरसात रही)-२
मैं तो छुप छुप के रोई, मैं तो दर्द में खोई
मेरी समझे कौन ?
दिन छिप गया निकले तारे

Comments/Credits:

			 % Transliterator:Srinivas Ganti 
% Date:January 15, 2002
% Comments:LATAnjali series
		     
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