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dil ke phaphole ... jal ke dil khaaq huaa

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दिल के फफोले जल उठे सीने के दाग़ से
लग गई इस घर को आग घर के चिराग़ से

जल के दिल खाक़ हुआ आँखों से रोया न गया
ज़ख्म ये ऐसे जले फूलों पे सोया न गया

हम खतावर हैं या हमको बनानेवाला
चाँद के मुखड़े पे भी दाग़ है काला काला
इतनी बरसातें हुई फिर भी वो धोया न गया

हँसते देखा न गया बाग़ के माली से हमें
धूल में फेंक दिया तोड़के डाली से हमें
दिल-ए-नदान को माला में पिरोया न गया

आसरा देके हमें आस का दिल तोड़ दिया
लाके साहिल पे अकेला हमें क्यों छोड़ दिया
बीच मँझ्धार में क्यों हमको डुबोया न गया

Comments/Credits:

			 % Transliterator: K Vijay Kumar
		     
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