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dil Gam se jal rahaa hai jale, par dhuaa.N na ho

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दिल ग़म से जल रहा है जले, पर धुआँ न हो
मुमकिन है इसके बाद कोई, इम्तेहां न हो

दुनिया तो क्या ख़ुदा से भी घबराके कह दिया -२
वह महर्बां नहीं तो कोई महर्बां न हो
दिल ग़म से ...

लूटा ख़ुशी ने आग लगा दी बहार ने -२
बरबाद इस तरह भी किसी का जहाँ न हो
दिल ग़म से ...

अब तो वहीं सुकूं मिलेगा मुझे जहाँ -२
ये संगदिल ज़मीं न हो, आस्मां न हो

दिल ग़म से जल रहा है जले, पर धुआँ न हो

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Rajiv Shridhar 
% Date: 10/25/1996
		     
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