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chup chaap akele chhup chhup ke - - Talat

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चुप चाप अकेले छुप छुप के
मैं गीत खुशी के गाता हूँ
दिल के ज़ख्मों को चील चील
मैं अपना जी बहलाता हूँ

ना भूला हूँ न भूलूँगा
वो दिन जो सपने आज बने
जो आज रूठ कर भूल गये
कल तक वो साथी थे अपने
अपने बेगाने बनते क्यों
जग से ये भेद छुपाता हूँ
अपना जी बहलाता हूँ ...

ज़ख्मी दिल का ये दावा है
बदनाम न होगा प्यार तेरा
एक आह न निकलेगी मूँह से
अब जलने दो संसार मेरा
बेताब हूँ आग बुझाने को
तो नयनन नीर बहाता हूँ
अपना जी बहलाता हूँ ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Vijay Kumar
		     
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