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chaudahavii.n ma.nzil pe jaalim aa gayaa - - Talat

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चौदहवीं मंज़िल पे जालिम आ गया, आ गया
चाँद मेरे चाँद से शरमा गया, शरमा गया

हो गए डोरे गुलाबी गाल के
रंग तो देखो शराभी आँख के
जिसने देखा बिन पिये लहरा गया
चाँद मेरे चाँद से शरमा गया

ज़ुल्फ़ में रंगत है काली रात की
रात भी कैसी किसी बरसात की
ज़ुल्फ़ लहराई तो बादल छा गया
चाँद मेरे चाँद से शरमा गया

दो कंवल के फूल हैं या गाल हैं
कुछ सुनहरी हैं झलक कुछ लाल हैं *
देख कर 'फ़ैयाज़' मैं घबरा गया
चाँद मेरे चाँद से शरमा गया, शरमा गया

कुछ सुनहरी है झलक कुछ लाल हैं

Comments/Credits:

			 % Date: 18 Apr 2004 (Ram Navami)
% Credits: from the Talat Geet Kosh
% Credits: V S Rawat
		     
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