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cha.nchal shiital nirmal komal sa.ngiit kii devii

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चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी -३
सुन्दरता की हर प्रतिमा से बढ़ कर है तू सुन्दर सजनी
चंचल शीतल ...

कहते हैं जहाँ ना रवि पहुँचे
कहते हैं वहाँ पर कवि पहुँचे
तेरे रंग-रूप की छाया तक ना रवि पहुँचे ना कवि पहुँचे
मैं छूने लगूँ तू उड़ जाए परियों से तेरे पर सजनी
चंचल शीतल ...

को : आ अ आ आ आ हं

मु: तेरे रसवंती होंठों का मैं गीत कोई बन जाऊँगा
सरगम के फूलों से तेरे सपनों की सेज सजाऊँगा
डोली में बैठ के आएगी जब तू साजन के घर सजनी
चंचल शीतल ...

ऐसा लगता है टूट गए सब तारे
टूट के सिमट गये
गोरे-गोरे इक चन्दा से रंगीं बदन पे लिपट गए
को: आऽ
मु: बनकर नथ कंगन करधनिया घुँघरू झुमके झूमर सजनी
को: ( चंचल शीतल निर्मल कोमल
मु: संगीत की देवी स्वर सजनी ) -२

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