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chaar din kii chaa.Ndanii thii phir a.ndherii raat hai

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( चार दिन की चाँदनी थी फिर अंधेरी रात है
हम इधर हैं वो उधर हैं बेक़सी का साथ है ) -२

क्या ख़बर थी उनका दामन हाथ से छुट जायेगा
ग़म के हाथों ज़िंदगी का कारवाँ लुट जायेगा
दिल लगा कर ग़म उठायें क्या अनोखी बात है

चार दिन की चाँदनी थी फिर अंधेरी रात है
हम इधर हैं वो उधर हैं बेक़सी का साथ है

Comments/Credits:

			 % Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)
		     
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