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bas ke dushwaar hai har kaam kaa aasaa.n honaa - - Sumana Roy

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बस के दुश्वार है हर काम का आसां होना
आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सां होना

गिरिया चाहे है ख़राबी मेरे काशाने की
दर-ओ-दीवार से टपके है बियाबां होना

वा-ए-दीवानगी-ए-शौक़ के हर दम मुझको
आप जाना उधर और आप ही हैराँ होना

हैफ़ उस चार गिरह कपड़े की क़िसमत ग़ालिब
जिसकी क़िसमत में है आशिक़ का गरेबाँ होना

Comments/Credits:

			 % transliterator: Animesh Kumar
% date: 28 Jun, 2003
% Credits: V S Rawat, Afzal A Khan, U V Ravindra
		     
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