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ashq aa.Nkho.n se ravaa.N aur jigar jalataa hai - - Hemant

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अश्क़ आँखों से रवाँ और जिगर जलता है
क्या क़यामत है कि बरसात में घर जलता है

न कहीं आग न शोले न धुआँ उठता है
वाह किस ढंग से उलफ़त का शहर जलता है
क्या क़यामत है कि बरसात में घर जलता है

आमद-ए-सुबह से जो ग़ुल हो वो चराग़ नहीं
दिल-ए-मासूम सनम शाम-ओ-सहर जलता है
क्या क़यामत है कि बरसात में घर जलता है

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Prithviraj Dasgupta
% Credits : Urzung Khan, Virendra Rawat
% Date: Dec 28, 2000
		     
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