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ashaar mere yuu.n to zamaane ke liye hai.n - - Mukesh

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अशयार मेरे यूं तो ज़माने के लिये हैं
कुछ शेर फ़कत उनको सुनाने के लिये हैं

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिये हैं

आँखों में जो भर लोगे तो कांटों से चुभेंगें
ये ख्वाब तो पलकों पे सजाने के लिये हैं

देखूं तेरे हाथों को तो लगता है तेरे हाथ
मन्दिर में फ़कत दीप जलाने के लिये हैं

सोचो तो बड़ी चीज़ है तहजीब बदन की
वरना तो बदन आग बुझाने के लिये है

Comments/Credits:

			 % Credits: (tanvi@utxvms.cc.utexas.edu)
%          Preeti Ranjan Panda (ppanda@ics.uci.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@astro.indiana.edu)
		     
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