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anuraadhaa o anuraadhaa ... gokul se gaye giradhaarii

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अनुराधा
ओ अनुराधा
क्यूँ री पगली
अरी इस तरह रोने से क्या होगा

तुम आँसू पोँछ रही हो
मगर मुझे हिचकियों की अवाज़ तो सुनाई दे रही है
अच्छा सुनो तुम्हें एक कहानी सुनाऊँ
बहोत दिन हुये एक बार

गोकुल से गये गिरधारी -२
हुई सूनी नगरी सारी
गोकुल से गये गिरधारी

जित देखो उत छाई उदासी रोवत है नर-नारी -२
गोकुल से गये गिरधारी

गिरधारी तो गोकुल से चले गये
जो वृन्दावन वाले थे उनका क्या हाल हुआ

नैनन नीर न चैन जिया में -२
शोक हुआ अती भारी -२

और गोपियों की हालत तो और भी ख़राब थी
बिचारी कहती थी

कैसे जाऊँ जमुना जल भरने
कैसे जाऊँ जमुना
जमुना जल भरने
कैसे जाऊँ जमुना जल भरने
तट पे न आज मुरारी -२

मगर सबसे ज़्यादा दुख जानती हो किसे हुआ था
अनुराधा जैसी एक राधा थी
बिचारी
बिचारी रो-रो कर कहती थी

कान्ह-कान्ह हर आन रटत मन -२
भूलत नाहीं बिहारी -२
कहे बिद्यापती मधुसूदन ने
राधे
राधे मन से बिसारी -२

Comments/Credits:

			 % Song courtesy: http://www.indianscreen.com (Late Shri Amarjit Singh)
		     
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