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a.ndoh se hu_ii na rihaa_ii tamaam shab - - Ghulam Ali

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अंदोह से हुई न रिहाई तमाम शब
मुझ दिलज़दा को नींद न आई तमाम शब

चश्मक चली गई थी सितारों की सुबह तक
की आस्माँ से दीदा-वराई तमाम शब

बैठे ही गुज़री वादे की शब वो न आ फिरा
ईज़ा अजब तरह की उठाई तमाम शब

जब मैं शुरू क़िस्सा किया आँखें खोल दीं
यक़ीनी थी मुझको चस्म-नुमाई तमाम शब

वक़्त-ए-सियह ने देर में कल यावरी सी की
थी दुश्मनी से इसकी लड़ाई तमाम शब

तारे से, तेरी पलकों पे, क़तरे से अश्क़ के
देते रहे हैं 'मीर' दिखाई तमाम शब

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