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ajii ham dillii ke daade hai.n

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मु : अजी हम दिल्ली के दादे हैं
म : दादे क्या परदादे हैं
दो : बुरों के हक़ में टेढ़े हैं भलों के हक़ में सादे हैं
हम दिल्ली के दादे हैं ...

मु : शहर की चौड़ी सड़कों पर हम सीना तान के चलते हैं
म : धन-दौलत वाले भड़भूजे हमको देख के जलते हैं
दो : अजी उनके और इरादे हैं अपने और इरादे हैं
अरे हम दिल्ली के दादे हैं ...

मु : जामा मस्ज़िद की सीढ़ी पर बैठ कर खिचड़ा खाते हैं
लाल क़िले के अगले-पिछले सब क़िस्से दोहराते हैं
दो : अजी यूँ लगता है जैसे हम लावारिस शहज़ादे हैं
अरे हम दिल्ली के दादे हैं ...

मु : दो दिन अपना बैंड बजा कर गई हुक़ूमत गोरों की
म : लेकिन अब भी धौंस है बाकी चोर-मुनाफ़ाख़ोरों की
देखें कब तक पूरे हों जो सरकार के वादे हैं
दो : दिल्ली के दादे हैं ...

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