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abr barasaa na hawaa tez chalii hai abake

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अब्र बरसा न हवा तेज़ चली है अबके
कितनी वीराँ तेरी यादों की गली है अबके

क्या कहूँ कितने बहानों से भुलाया है उसे
ये क़यामत बड़ी मुश्किल से टली है अबके

या मेरी आँख के कश्कोल में आँसू चमका
या अंधेरे में कोई शम्मा जली है अबके

किसको फ़ुरसत है धुवाँ देखने जाये 'मोहसिन'
झोपड़ी शहर से कुछ दूर जली है अबके

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