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aavaaz dii hai aaj ik nazar ne

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भू: आवाज़ दी है आज इक नज़र ने
या है ये दिल को गुमाँ
दोहरा रहीं हैं जैसे फ़ज़ायें
भूली हुई दास्ताँ - २

आ: लौट आयी हैं फिर रूठी बहारें
कितना हसीन है समा
दुनिया से कह दो न हम को पुकारे
हम खो गये हैं यहाँ - २

भू: जीवन में कितनी वीरानियाँ थी
छायी थी कैसी उदासी
सुनकर किसी के कदमों की आहट
हलचल हुई है ज़रा सी - २

सागर में जैसे लहरें उठीं हैं
टूटी हैं खामोशियाँ
दोहरा रहीं हैं जैसे फ़ज़ायें
भूली हुई दास्ताँ

आ : तूफ़ान में खोई कश्ती को आखिर
मिल ही गया फिर किनारा
हम छोड़ आये ख़ाबों की दुनिया
दिल ने तेरे जब पुकारा - २

कबसे खड़ी थी बाहें पसारे
इस दिल की तन्हाइयाँ
दुनिया से कह दो न हम को पुकारे
हम खो गये हैं यहाँ

भू: अब याद आया कितना अधूरा
अब तक था दिल का फ़साना

आ: यूँ पास आके दिल में समाके
दामन न हमसे छुड़ाना - २

आ: जिन रास्तों पर तेरे कदम हों
मंजिल है मेरी वहाँ
दुनिया से कह दो न हम को पुकारे
हम खो गये हैं यहाँ
लौट आयी हैं फिर रूठी बहारें
कितना हसीन है समाँ
दुनिया से कह दो न हम को पुकारे
हम खो गये हैं यहाँ

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