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aa.Nkho.n me.n qayaamat ke kaajal

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आँखों में क़यामत के काजल
होंठों पे गज़ब की लाली है
बंदापरवर कहिये किसकी
तक़दीर संवरने वाली है

सज़के...
सज़के मैं तुम्हारी बाहों के
जो आग लगा दी पानी में
क़ुरबान तुम्हारी आँखों के
जो भर दें रंग जवानी में
मर जाऊँ तुम्हारे गालों पर
जिन में के गुलों की लाली है
बंदापरवर ...

ओ हो हो...
ये आपकी मस्ती का आलम
ये बहके हुए जज़बात मेरे
कुछ कह न सका मैं दीवाना
कहते हैं मगर हालात मेरे
या आप नशे में डूबे हैं
या मेरी नज़र मतवाली है
बंदापरवर ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Ravi Kant Rai (rrai@ndsun.cs.ndsu.nodak.edu)
% Editor: Anurag Shankar (anurag@astro.indiana.edu)
		     
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