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aa.Nchal se kyo.n baa.Ndh liyaa mujh paradesii kaa pyaar

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आँचल से क्यों बाँध लिया मुझ परदेसी का प्यार
जानेवाले से रुकने की आशा है बेकार
आँचल से क्यों ...

कल सुबह होने से पहले करुंगा जाने की तैयारी
फिर सारा दिन ढल जायेगा और आयेगी शाम अंधियारी
खड़ी खड़ी तुम राह तकोगी रख के कमर पर हाथ आ हा
आँचल से क्यों ...

यूँ ही रात भी आ जायेगी लेकिन मैं नहीं आऊँगा
दूर खड़ा मंज़िल पे कहीं मैं थक कर जब सो जाऊँगा

मेरी कमी महसूस करोगे रोवोगे अफ़सोस करोगे
बोलो फिर क्या निर्दयी कह कर बंध खुले द्वार
आँचल से क्यों ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Prithviraj Dasgupta
% Date: Dec 18, 2001
% Comments: Availability: The Unforgettable Hemant Kumar
% HTC 02B 4455/56 - 2 pack CS
		     
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