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aaj use phir dekhaa hai - - Talat

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आज उसे फिर देखा है, देखा है

रोज़ किया करता था याद
लेकिन आज बुहत दिन बाद
गाँव के छोते पंघट में
चांद सा चहरा घूँघट में
मैं ने चमकते देखा है

शाम का बादल छाने को था
सूरज भी छुप जाने को था
उस के रूप के सूरज को जब
में ने उठते देखा है

नाम मुझे मालूम नहीं है
शर्मीली है कमसिन है वो
दिल की रानी बना चुका
बना चुका हूँ
कहने को पनहारन है वो
एक नज़र में दिल की दुनिया
मैं ने बदलते देख है

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