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aaj kii raat nahii.n shikave shikaayat ke liye

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आज की रात नहीं शिकवे शिकायत के लिये
आज हर लम्हा हर एक पल है मुहब्बत के लिये
रेशमी सेज है महकी हुई तन्हाई है
आज की रात मुरादों की बारात आई है
आज की रात ...

हर गुनाह आज मुक़द्दस है फ़रिश्तों की तरह
काँपते हाथों को मिल जाने दो रिश्तों की तरह
आज मिलने में न उलझन है न रुसवाई है
आज की रात मुरादों की बारात आई है
आज की रात ...

अपनी ज़ुल्फ़ें मेरे शाने पे बिखर जाने दो
इस हसीं रात को कुछ और निखर जाने दो
सुबह ने आज न आने की क़सम खाई है
आज की रात मुरादों की बारात आई है
आज की रात ...

Comments/Credits:

			 % Transliterator: Hrishi Dixit 
% Date: October 23, 1999 
% Comments: Geetanjali series
		     
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