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aaj is Kat me.n na_ii baat tumhe.n likhataa huu.N - - Rafi

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आज इस ख़त में नई बात तुम्हें लिखता हूँ
एक शायर के ख़यालात तुम्हें लिखता हूँ
आज इस ख़त ...

मुझको मालूम ये है ग़ैर का अरमान हो तुम
चंद लम्हे को जो आये हो वो मेहमान हो तुम
उलझे-उलझे से सवालात तुम्हें लिखता हूँ
आज इस ख़त ...

अपनी वीरान मोहब्बत को सजाने के लिये
कितनी माँगी थी दुआयें तुम्हें पाने के लिये
कैसी पुरकैफ़ थी वो रात तुम्हें लिखता हूँ
आज इस ख़त ...

मेरे हमदम मेरे साथी मेरे ग़मख़्वार कहो
क्या इसी तरह मिलोगे मुझे हर बार कहो
जो न लिखनी थी वही बात तुम्हें लिखता हूँ
आज इस ख़त ...

Comments/Credits:

			 % Series: Rafi Veritable Gems, Date: 15 Aug 2004
		     
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